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Showing posts from April, 2021

मौत की सरकार

केंद्र में बैठी मोदी सरकार ही ऑक्सीजन की कमी से हुई हर एक मौत की पूरी तरह से जिम्मेदार है !......यदि आप जानना चाहते हैं कैसे ? तो यह लेख पढ़ लीजिए जब से कोरोना की शुरुआत हुई है हम सब जानते हैं कि ऑक्सीजन थेरेपी ही इस बीमारी के इलाज का पहला चरण है .....मेडिकल ऑक्सीजन एक आवश्यक दवा है जिसे WHO द्वारा साल 2015 में जारी की गई अति आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किया गया था कल एक डॉक्टर का बयान पढ़ रहा था, उनका कहना है कि ब्लड थिनर, रेमडेसिविर या कोई भी दवा देने से पहले हम ऑक्सीजन ही देते हैं. सामान्यतः आक्सीजन 97-98 प्रतिशत होती है. शरीर में ऑक्सीजन कुछ देर के लिए 90-88 भी है तो व्यक्ति कुछ समय तक तो बर्दाश्त कर सकता है लेकिन अगर ऑक्सीजन लेवल इससे नीचे जाता है तो जान बचने की संभावना कम होती जाती है. ऐसे में ऑक्सीजन सबसे पहली दवा है." पिछले साल मार्च में शुरू हुए कोरोना संकट के बाद भी देश में मेडिकल ऑक्सीजन का स्टॉक बनाए रखने के लिए कोई खास कोशि​श नहीं की गई.   साल 2020 में लॉकडाउन के एक हफ्ते बाद सेंटर फॉर प्लानिंग द्वारा 11 अफसरो के एक समूह एम्पावर्ड ग्रुप 6 (ईजी-6) ने शुरू से ही इस...

ट्रिलियन इकॉनमी और कर्ज़

"ऋणम कृत्वा मुल्लम टाइटम कुर्वेत" द हिन्दू की खबर है कि भारत का कर्ज जीडीपी का 90 प्रतिशत हो गया है। 2014 में यह 52% था। मतलब की तब इकॉनमी 2 ट्रिलियन थी, कर्जा एक ट्रिलियन। यह 1947 से 2014 तक हुआ।  अब इकॉनमी 3 ट्रिलियन है, कर्ज पौने तीन ट्रिलियन। अर्थात वत्स, जितना सत्तर साल में लिया, केवल सात साल में उससे डेढ़ गुना कर्ज ले लिया। अहो, अहो, अहो ..   सरकार ने कर्ज के अलावे हाड़तोड़ टैक्स भी कमाया है। व्यापारी को कर्ज लेकर टैक्स भरने की नौबत है। अब मजबूत सरकार पाली है, तो जरा महंगी तो पड़ेगी। लेकिन क्या आपमे पूछने की हिम्मत है,कि तमाम पैसा गया कहां??  -- उन सत्तर सालों का 52% कर्ज तो आँखों दिखता है। कल, कारखाने, बांध, सड़कें, हस्पताल, स्कूल, कॉलेज..। दो चार लाख करोड़ खान्ग्रेसी खा गए, यह भी माना। पर इधर सात साल में अथाह पैसे कहाँ गए।  हिसाब व्हाट्सप्प पर आ सकता है। कितने चिनूक खरीदे, रफेल खरीदे, S-400, गोली बम बारूद खरीदे। पहले सेना के पास जूते और यूनिफार्म भी नही थे। अभी ही तो खरीदा है। पर व्हाट्सप का सारा हिसाब जोड़ लें, तो भी एक-दो लाख करोड़।  यहां सवाल 150 लाख करो...

PM केअर फण्ड की असलियत

PM cares फंड की कहानी सुनेंगे?  19 मई 2020 को TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक PM cares फंड पहले तीन महीने में कुल 10,600 करोड़ रुपए जमा हुआ।  13 मई 2020 को सरकार ने इसमें से 3100 करोड़ रुपए कोविड अभियान के तहत जारी किए।  2000 करोड़- भारत में बने 50,000 वेंटिलेटर के लिए। 1000 करोड़- प्रवासी मजदूरों पर खर्च होने थे ताकि वो बिना परेशानी घर पहुंच जाएं। 100 करोड़- वैक्सीन के निर्माण के लिए लगने थे। तीनों मदो का क्या हुआ यह समझते हैं। मार्च 2020 में नोएडा की Agva नाम की एक कम्पनी को 10,000 वेंटिलेटर बनाने का ठेका दिया।  कंपनी के पास इससे पहले हाई-एंड वेंटिलेटर बनाने का कोई अनुभव नहीं। फिर भी 166 करोड़ का ठेका और 20 करोड़ एडवांस दे दिया। 16 मई को पहले क्लिनिकल ट्रायल में वेंटिलेटर फेल। 1 जून 2020 को दूसरे क्लिनिकल ट्रायल में भी फेल।  Agva के अलावा दो कंपनियो को भी ठेका मिला था।  पहली थी आंध्र सरकार की कंपनी AMTZ. दूसरी गुजरात की निजी कंपनी ज्योति CNC। दोनों के पास हाई- एन्ड वेंटीलेटर बनाने का कोई अनुभव नहीं।  ज्योति CNC को 5000 वेंटिलेटर बनाने का  ठेका 121 ...

जो यूँ होता तो क्या होता?

जो यूं होता तो क्या होता ???  बंटवारा, हिंदुस्तान का। रेडक्लिफ लाइन जमीन पर ही नही, आम हिंदुस्तानी के दिल पर चला हुआ वो चाकू है, जिसका घाव, मौजूदा हिन्दू-मुस्लिम डिबेट के बीच, रह-रह कर मवाद फेंक रहा है।  दो बड़ी ख्वाहिशें हमारी है, इतिहास से। पहली कि काश, बंटवारा न हुआ होता। और दूसरी- काश, कांग्रेस न होती, गांधी नेहरु भी न होते। तो धर्मनिरपेक्षता का नाटक न होता, 1947 में हिन्दू राष्ट्र घोषित हो गया होता।  आइये दोनों ख्वाहिशों को उस दौर परिस्थितियों को सुपर-इंपोज करते हैं।  -- 1937 के भारत का नक्शा देखिये। ये बर्मा से बलूचिस्तान तक फैला है। इसमे एक केंद्रीय सरकार है, वाइसराय इसके राष्ट्रपति की तरह हैं। इसके अंडर दो तरह के राज्य है।  1- एक तो वैसा ही, जो आज है। याने केंद्र के नीचे एक गवर्नर और  विधानसभा, यूनाइटेड प्रोविन्स ( लगभग उत्तर प्रदेश) सेंट्रल प्रोविन्स ( लगभग मध्यप्रदेश) बंगाल ( बिहार,उड़ीसा, पच्छिम बंगाल और बंगलादेश) मद्रास वगेरह ये ब्रिटिश डायरेक्टली शाशन करते थे। ये देश का 52-55% हिस्सा था। इसे एक गिनिए।  2- बाकी देशी रियासतें। जो सेना, संचार, ...