कृष्ण जन्माष्टमी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सभी को बधाई और शुभकामनाएं....
मुझे श्रीकृष्ण अच्छे लगते हैं... इसलिए भी क्योंकि उन्हें लेकर अभी उतनी डरावनी राजनीति नहीं हुई, दंगें फसाद नहीं हुए। पहले राम भी अच्छे लगते थे, अब उनके "जय श्रीराम" के नारे से डर लगता है...
श्रीकृष्ण अन्य देवी देवताओं से इसलिए भी भिन्न हैं क्योंकि उनके द्वारा "भागवत गीता" रची गई, मैंने पढ़ी है , मेरे घर की लाइब्रेरी में मौजूद है, मुझे पसंद है...
श्रीकृष्ण इसलिए भी अलग हैं क्योंकि उनकी महिमा में हिंदुओं से अधिक मुसलमानों ने हिंदी, उर्दू, ब्रजभाषा, और अन्य भाषाओं में दोहे लिखे हैं... सबसे महत्वपूर्ण कि मुसलमान होते हुए मुगलकाल में इन सभी लोगों ने कृष्ण लीला लिखी...जैसे
1-सैयद इब्राहिम अर्थात "रसखान" ब्रजभाषा में इन्होंने कृष्ण की लीला में ऐसा दोहे लिखे कि इन्हें ही "रस की खान" कहा जाने लगा और अन्ततः वह कालजई "रसखान" हो गये।
उनकी रचनाएँ, जैसे "मानुष हौं तो वही रसखानि बसौ ब्रज गोकुल गांव के ग्वारन" और "धूर भरे अति शोभित स्याम जू",
सैयद इब्राहिम को श्रीकृष्ण से इतना प्रेम था कि उन्होंने भागवत गीता का फारसी में अनुवाद भी किया।
2-फिर अमीर खुसरो जो सूफी संत निज़ामुद्दीन औलिया के शिष्य थे और उन्होंने कृष्ण राधा की प्रेम लीला को समेटे कालजयी रचना लिखी "छाप तिलक सब छीन ली रे मोसे नैना मिलाइ के" AWSM
3-आलम शेख ने "आलम केलि", "स्याम स्नेही" और "माधवानल-काम-कंदला" जैसे ग्रंथों में कृष्ण की बाल लीलाओं और प्रेम का चित्रण किया।
4-अब्दुल रहीम खानखाना तो मुगल दरबार के कवि थे जिन्होंने नीतिपरक दोहों के साथ-साथ कृष्ण भक्ति में रचनाएँ लिखीं, जैसे "जिहि रहीम मन आपुनों, कीन्हों चतुर चकोर"।
5-नज़ीर अकबराबादी ने कृष्ण लीला की रचनाएँ लिखीं जैसे "तू सबका ख़ुदा, सब तुझ पे फ़िदा" और "कन्हैया का बालपन"...
6-वाजिद अली शाह अवध के अंतिम नवाब थे, जिन्होंने 1843 में राधा-कृष्ण पर आधारित एक नाटक का निर्देशन किया और कृष्ण भक्ति में रचनाएँ लिखीं , वाजिद अली शाह को उस समय "कन्हैया" नाम से भी जाना जाता था।
7-काज़ी नज़रुल इस्लाम बंगाल के कवि थे जिन्होंने कृष्ण पर रचनाएँ लिखीं, जैसे "अगर तुम राधा होते श्याम, मेरी तरह बस आठों पहर तुम, रटते श्याम का नाम"।
8-मौलाना हसरत मोहानी को कौन नहीं जानता 20वीं सदी के कवि और स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने कृष्ण की बाँसुरी को जीवन का संदेश देने वाला बताया, जैसे "पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था हर नग़्मा कृष्ण बाँसुरी का" पूरी नज़्म लिखी.
9-सालबेग ओडिशा के सूफी संत थे जिन्होंने कृष्ण और जगन्नाथ के प्रति भक्ति गीत लिखे और इसी कारण हर साल होती जगन्नाथ रथ यात्रा उनकी मजार पर ज़रूर रुकती है।
10-ताज बीबी पंजाब की कवयित्री थीं जिन्होंने कृष्ण की भक्ति में दोहे लिखे, जैसे "छैल जो छबीला, सब रंग में रंगीला"
11-कवि जमाल जिन्होंने कृष्ण की गौचारण लीला का पूरी किताब लिख कर वर्णन किया, जैसे "करज्यो गोर जमाल की, नगर कूप के मांय"।
12-सैयद मुबारक जिनकी रचनाएँ राधा-कृष्ण के प्रेम को दर्शाती हैं, "वह सोकरि कु की खोरि अचानक माधव राधा भेंट भई"।
13- शेख रंगरेजन जिन्होंने कृष्ण की मधुर लीलाओं का वर्णन किया, जैसे "जबतें गोपाल मधुबन की सिधारे भाई"।
14- सैयद गुलाम नबी जिनकी रचनाएँ रस और भक्ति से परिपूर्ण हैं, जैसे "राधापद बाधा हरन साधा करि रसलीन" और कृष्ण राधा के प्रेम के दोहों में इन्होंने इतना रस डाला कि इन्हें "रसलीन" कहा जाने लगा।
कितने के नाम लिखूं बहुत लंबी सूची है.. जैसे सईद सुल्तान, अली रज़ा, नाज़िर शाह, सुल्तान हुसैन शाह, चरक चिनियोटी, उमर अली, नशीर मामूद, और मौलाना ज़फर अली आदि ने भी कृष्ण भक्ति में रचनाएँ लिखीं।
यह सूची 50 से अधिक है... इन मुसलमानों ने कृष्ण महीमा में चार-चांद लगाएं हैं...यह सम्मान सिर्फ श्रीकृष्ण को हासिल है... इसीलिए श्रीकृष्ण से प्रेम है...
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