वोटर बनो सपोटर नही

ज़रा ध्यान से पढ़िएगा .....देश की राजनीतिक समस्या का समाधान इस पोस्ट में है.....

जिसकी जितनी दावेदारी ...उसकी उतनी हिस्सेदारी.....

मुझे जब भी राजनीति अबूझ लगने लगती है तो मैं शंकर चाचा को फोन लगाता हूँ.(अक्सर इनसे राजनीतिक चर्चा करता रहता हूँ)......हाई स्कूल से राजनीति शास्त्र के अध्यापक के पद से रिटायर गाँधीवादी शंकर चाचा आज - कल गाँव में रहते हैं पहले हमारे घर के बगल में रहते थें.... चाचा का कुछ  समय बच्चों को पढ़ाने और कुछ समय खेती का काम देखने मे जाता है.....

तो मैंने उनको फोन घुमा दिया ...नमस्ते , हाल -  समाचार होने के बाद मैंने कहा चाचा कुछ सवाल पूछना था....

शंकर चाचा :  पूछो

मैंने पूछा...चाचा अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि हम किस पार्टी को वोट दें ?

शंकर चाचा :  हँसते हुए.... ये तो मैं नहीं बता सकता... ....वैसे ये बात किसी को कहना भी नहीं चाहिए कि वो किस पार्टी को वोट दे.....हाँ ...ये ज़रूर बता सकता हूँ कि किस नीति पर किसी पार्टी को वोट दो.......लोग वोट देने की नीति बदलें ...राजनीति अपने आप बदल जाएगी ....

मैंने कहा ....चाचा वो क्या है ?

शंकर चाचा : वो नीति है ...."जिसकी जितनी दावेदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी" .....और किसी की दावेदारी इस आधार पर तय होगी कि उसकी सँख्या कितनी है....!

मैंने कहा ....चाचा थोड़ा विस्तार से बताईये न...

शंकर चाचा : चलो तुम्हे मुसलमान के उदाहरण से ही समझाते हैं....पूरे देश मे मुसलमानों की संख्या कितनी है ?

मैंने कहा ....करीब 15 %....

शंकर चाचा : 543 लोकसभा का 15 % ....करीब 81 हुआ..... तो जो पार्टी 81 सीटो पर मुसलमानों को उम्मीदवारी देगी उसे ही वोट दो...

मैंने कहा ....चाचा कोई भी पार्टी सारी सीटो पर थोड़े ही लड़ती है...

शंकर चाचा : चलो 100 से समझते हैं.....मान लो कोई पार्टी A 100 सीटों पर चुनाव लड़ रही है तो उसे 15 सीटों पर मुसलमान उम्मीदवार खड़े करने होंगें....

मैंने कहा ...चाचा ..और लोगो का क्या होगा...
शकंर चाचा : सबको मिलेगा..... जैसे भारत में ओबीसी की संख्या 52% है तो ...पार्टी A को 100 में  52 सीटों (543 में से 282) पर ओबीसी उमीदवारों को खड़ा करना होगा......दूसरे अल्पसख्यकों को भी पार्टी A को उनकी सँख्या के अनुपात में सीटे देनी होगी ....रही बात सामान्य वर्ग की तो जितनी उनकी  संख्या है उसी अनुपात में उनको भी उम्मीदवारी मिलनी चाहिए (  एससी / एसटी के लिए सीटें आरक्षित हैं ...उसमे जो सँख्या में कमी है उसे सिर्फ़ बढ़ाना होगा )......इससे सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व हो पाएगा.... तभी वास्तव में सबका साथ , सबका विकास धरातल पर उतर पाएगा......और चूँकि ये पार्टी के स्तर पर होगा तो कोई कानून बनाने की भी ज़रूरत नहीं है....इसलिए जो पार्टी इस नीति पर टिकट बांटती है उसे ही वोट दो....चाहे वो कोइ भी पार्टी हो...

मैंने कहा : इस नीति से क्या फायदा होगा....क्या बीजेपी को हरा देंगे ?

शंकर चाचा : थोड़ा हंसते हुए...ये सवाल तुम्हारा सबसे मज़ेदार है.....सबसे पहले तो ये समझो अगर सिर्फ बीजेपी से लड़ोगे तो अगले 50 साल तक उसे नहीं हरा पाओगे ....क्योंकि तब विपक्ष की टीम में कई ऐसे खिलाड़ी भी होंगे जो बल्लेबाजी तो तुम्हारी तरफ से करेंगे लेकिन अंत मे उनका बनाया रन ,  बीजेपी के खाते में चला जाएगा ( ज्योतिरादित्य सिंधिया )....ऐसे में तुम मैच कभी नहीं जीत पाओगे.....इसलिए सिर्फ बीजेपी से लड़ने की जगह संघ ( बीजेपी के संघी , दूसरी पार्टी के संघी , समाज मे छिपे हुए संघी और सिस्टम में बैठे हुए संघी ) को टारगेट करो.....अमित शाह को पता था कि जनता सिर्फ बीजेपी को टारगेट करेगी तभी उन्होंने कहा कि हम 50 साल शासन करेंगें ..........और संघीवाद को अगर कोई वाद हरा सकता है तो वो है बहुजनवाद ( एससी , एसटी ,ओबीसी और अल्पसख्यकों का संयोग )......अभी जो दावेदारी - हिस्सेदारी की नीति बताई वही बहुजनवाद है .....जब इस नीति को कांग्रेस जैसी पार्टी लागू करेगी तो उसमे जो संघी छिपे बैठे है वो  बिलबिलाते हुए फटाक से पहली ट्रैन का टिकट लेकर 10 जनपथ से नागपुर प्रस्थान कर जाएँगे.....क्योंकि इस नीति के लागू हो जाने से उन्हें अतिरिक्त मलाई नही मिल पाएगी ....और विपक्ष की जीत में यही संघी सबसे बड़ा रोड़ा है.....इनके जाने के बाद जो 10 जनपथ में बचेगा वो समाजवादी होगा.....सबसे बड़ी बात बीजेपी ने हिंदुत्व की घुट्टी जिन ओबीसी और एससी को पिला रखी है वे भी बहुजनवाद का रसपान करने विपक्षी खेमे में आ जाएँगे......इसलिए सीट बंटवारे की दावेदारी - हिस्सेदारी नीति को जो भी पार्टी लागू करें.....लोग उसे वोट दे सकते हैं......और वैसे भी आज किसी भी पार्टी में इतनी ताकत नहीं है कि वो अकेले संघ को हरा सके......तो आज नही तो कल सभी विपक्षी पार्टियों को इसी नीति पर एक छतरी के नीचे आना पड़ेगा तो अपने आप लोगों का वोट सभी विपक्षियों के लिए संयुक्त माना जाएगा....

मैंने कहा : बीजेपी को भी ...?

शंकर चाचा : ये सम्भव नहीं है कि बीजेपी दावेदारी - हिस्सेदारी  नीति को लागू करे (लोकसभा में बीजेपी के 302 में एक मुस्लिम है ...कुल 543 में ओबीसी के मात्र 120 मतलब सिर्फ 22 %....इसको समझने के लिए कमेंट बॉक्स के लिंक दिया गया है उसे पढिए ) क्योंकि जिस ब्राह्मणवादी आधारशिला पर वो खड़ी है वो इसकी इसकी इज़ाज़त कभी नही देगा... अगर दे दिया तो नागपुर का मज़बूत किला भरभरा कर ढह जएगा.....

मैंने कहा ...चाचा कुछ लोग कहते हैं कि मुसलमानों को किसी एक ही पार्टी को इक्कठा वोट करना चाहिए....

शंकर चाचा : देखो इससे  मुसलमानों का नुकसान होगा.......कैसे...

पहला.....बीजेपी मुसलमानों के एक पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण का हिन्दुओ को अपने पक्ष में ध्रुवीकृत करेगी...इस पिच पर संघ को कभी नहीं हराया जा सकता है.....

दूसरा.....मुसलमानों की राजनीतिक बार्गेनिग करने की क्षमता कम हो जाएगी .....

तीसरा....आप उस पार्टी के गुलाम बन जाएँगे ...जैसे कई सालों तक कांग्रेस के बने रहें..

चौथी ...और सबसे बड़ी बात....20 करोड़ मुसलमानों को किसी एक पार्टी के लिए एकमत करना क्या कभी सम्भव है ?.......उल्टा इस चक्कर मे आपस मे ही सिर फोड़ेंगे......इसलिए जो पार्टी भी संख्या अनुपातिक प्रतिनिधित्व दे उसे ही वोट दो......हाँ .....ये ज़रूर देखा जाना चाहिए कि एक विधानसभा या लोकसभा में वोटों का बटवारा न हो....और हाँ.... वोटर बनो सपोटर नहीं...

मैंने कहा...इसमे क्या अंतर है चाचा...?

शंकर चाचा :  देखो.. वोटर अपने और समाज के हित मे वोट करता है और सपोटर किसी नेता या पार्टी की भक्ति में वोट करता है......

मैंने कहा...अगर कोई भी पार्टी दावेदारी - हिस्सेदारी नीति पर टिकट न दे तो....

शंकर चाचा : तो मीडिय द्वारा इसके लिए पार्टियों पर जनदबाव बनवाओ...

मैंने कहा.....लेकिन ये ब्राह्मणवादी गोदी मीडिया क्यों दावेदारी - हिस्सेदारी नीति के लिए दबाव बनाएगी....

शंकर चाचा : सोशल मीडिया तो तुम्हारे पास है,  जितने भी लोग उस प्लेटफार्म पर हैं उनसे कहो...दावेदारी - हिस्सेदारी नीति के पक्ष में  लिखकर पार्टियों पर जनदबाव बनाए और एससी , एसटी , ओबीसी और अल्पसख्यकों की समस्याओं पर भी बातें लगातार सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर गर्म रहनी चाहिए और जो ऐसा नहीं करे समझ जाओ कि वो संघी है.....ऐसे संघियों को ही तो पहले अपनी टीम से बाहर करना होगा....संघी नेता अपने आप भाग जाएँगे...

तभी बच्चों की आवाज़ें आनी लगी ....तो चाचा ने कहा बच्चें पढ़ने के लिए आ गए..... फिर बात होगी....

मैंने कहा....ठीक है चाचा ....नमस्ते...

शंकर चाचा की बातों से मेरी उलझन तो खत्म हो गई .....और आपकी ?

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